आज़ादी के ६३ साल बाद का भारत........

हमारे देश भारत को स्वतंत्र हुए ६३ वर्ष पूरे हो चुके है| लेकिन ज्यादा कुछ नहीं बदला है | 
स्वतंत्रता  प्राप्ति के बाद के कुछ वर्षों तक देश को सँभालने वाले राजनेतिक नेताओं के सर पर टोपी और खादर का पहनावा एक विशेष पहचान होती थी |
लेकिन आज आज के राजनेताओं के सर पर वो टोपी और वो पहनावा दिखाई नहीं देता|
इससे मेरा आशय यह है की पहले भ्रष्टाचार प्रतिशत कम था और वो भी छुपा रहता था (टोपी से) परन्तु आज के दिन में वो खुले आम है वेह भी डंके की चोट पर |
इसका पर आलम यह है की चोरी और सीना जोरी |
यह है मेरा इण्डिया .........
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सुधर जाओ भैया

अगर बच्चे नालायक हो तो बाप को क्या क्या नहीं करना 


पड़ता | अब अपने अभिषेक को ही ले लीजिये बैठकर फुनवा   


पर बात करने के आलावा और किसी चीज मैं ध्यान ही नहीं 


रहता | पर बाप अमिताभ बाप रे बाप ! क्या क्या नहीं करना पड़ता , खर्चा 


चलने के लिए एड़ी की क्रीम से लेकर सर के  तेल तक, टूथपेस्ट से लेकर खाने 


पीने का सामान तक बेचा है, ये सब छोड़ो सीमेंट तक बेचा है 


बिचारे ने | न जाने बिचारा खर्च चलने के लिए सुबह से शाम 


तक कितना सामान बेचता है | अभिषेक को बात करने के 


आलावा कुछ सूझता ही नहीं है, इसलिए अभिषेक सुधर जाओ और बाप के काम में साथ दो |
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मिस्र का बंटाधार

कितना विस्मयकरी है कि तानाशाह इतिहास से सबक नहीं लेते | तानाशाही किसी भी रूप में हो राजशाही, सैनिक तानाशाही, या लोकतान्त्रिक तानाशाही (जैसा कि अब लोकतंत्र के नाम पर कुछ गिने चुने लोगो के हाथ में ही सत्ता रहती है) ये तानाशाही शक्तियां केवल कौरवों को ही अपना आदर्श मान कर जीवन भर भौतिक सुख भोगना चाहते है पांडवों की तरह अमर नहीं होना चाहते | ऐसा ही हाल कुछ मिस्र का है इस समय |
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गेम खेलो और दुआएं लो

जाहिर है आज के समय में लोग अपना काम  करते करते बोर हो जाते है तो वो अपना मन लगाने के लिए गेम या गाने सुनते है ताकि वो अपना मन लगा सके तो आप एक गेम खेल सकते है जिससे आप अन्न की कमी से जूझ रहे देशों के लोगों की अन्न मुहैया करा सकते है | खेल के साथ साथ आपको दुआएं भी मिलेंगी | इस गेम को खेलने के लिए आपको जरा भी पैसे खर्च नहीं करने पड़ेंगे बस गेम ढंग से खेलना होगा | इस गेम को आप www.freerice.com |
यहाँ आपको शब्दों के सही अर्थ बताने होंगे | प्रत्येक सही अर्थ बताने पर वेबसाइट चावल के १० दाने यूनाइटेड नेशंस के वर्ल्ड फ़ूड प्रोग्राम को दान कर देगी |
गेम में पूछे जाने वाले शब्द के साथ ४ विकल्प भी दिए जायेंगे जिनमे से एक सही होगा | चावल भेजने के लिए धन साईट पर विज्ञापन देने वाली कंपनियां उपलब्ध कराएंगी | इस वेबसाइट को २००७ मैं जॉन ब्रीन ने लॉन्च किया था |
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मोबाइल और इंसान में ३६ का आंकड़ा

जैसा की हम सभी जानते है की मोबाइल की टावरो से निकलने वाली चुम्बकीय तरंगो से इंसानी सेहत को नुकसान पहुचता है लेकिन पहली बार सरकार ने इसे स्वीकार किया है |

आइये देखते है इन तरंगो के लक्षण और इनसे बचने के तरीके 


लक्षण - सर में जलन, सरदर्द कान में घंटियाँ बजना, कमजोरी, चक्कर आना, नींद में खलल, धडकन बदना आदि |


सावधानी - 

  • मोबाइल पर बात करते वक़्त हैण्ड फ्री मोड पर रखे तो बेहतर होगा |
  • मोबाइल की उर्जा दर १.६ वाट प्रति किलोग्राम होती है यह बताती है की हमारा शारीर इस उर्जा को कितना अवशोषित कर सकता है |
  • बच्चो को मोबाइल से दूर रखे और बहुत जरुरी हो तो कम से कम बात करें |
  • कॉल की बजाये मेसेज का प्रयोग करें |
  • अपने शारीर से मोबाइल कम से कम ३० से. में. की दूरी पर रखे | 
  • अपने घर के आसपास टावर न लगाने दे |


हम पर खतरा है ज्यादा - वैसे तो मोबाइल फ़ोन दुनिया भर में इस्तेमाल होता है लेकिन भारत में बिकने वाले मोबाइल की उर्जा दर २ वाट प्रति किलोग्राम होती है इसलिए हमे ज्यादा खतरा है |
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गणतंत्र दिवस पर विशेष

सभी भारतीय, मेरे सभी मित्रो और सभी भाई बंधुओं को गणतंत्र  दिवस की हार्दिक शुभकामनाये | वैसे तो आप सभी को मालूम है की हम अपना गणतंत्र दिवस क्यों मानते है पर फिर भी मैं अपनी तरफ से इस पर एक प्रकाश डालना चाहूँगा |




आज यानि कि २६ जनवरी २०११ को हम अपना ६१वां गणतंत्र  मना रहे हैं| इसी दिन देश का संविधान लागू हुआ था|
पहले गवर्नमेंट ऑफ़ इंडिया एक्ट १९३५ के तहत शासन चलता था|
 भारतीय संविधान को बनाने के लिए २८ अगस्त १९४७ में डा भीमराव अम्बेडकर कि अध्यक्षता में एक कमिटी गठित की गयी|








संविधान लिखने की कार्यवाही ४ नवम्बर १९४७ से शुरू हुई|  
१६६ दिन इसके सत्र चले| ३०८ सेंट्रल असेम्बली सदस्यों ने इसकी हाथ से लिखी हुई प्रति पर २४ जनवरी १९५० को हस्ताक्षर किये| ठीक दो दिन बाद २६ जनवरी को यह दस्तावेज भारत के संविधान के रूप में स्वीकार कर लिए गए और तभी से हम अपना गणतंत्र मानाने लगे|









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अब तुरंत होगा फंड ट्रांसफर


फंड के ट्रांसफर में होने वाली देरी से ग्राहकों को निजात मिलने की उम्मीद है। भारतीय रिजर्व बैंक [आरबीआइ] ने इलेक्ट्रॉनिक तरीके से फंड ट्रांसफर करने की प्रक्रिया को तेज बनाने के मकसद से अहम शुरुआत की है। उसने बैंकों को कहा है कि वे इस तरह के सौदों में केवल ग्राहकों के खाता संख्या पर ही ध्यान दें। ग्राहकों के नाम तथा अन्य ब्यौरे को मिलाने में वक्त जाया न करें।

नई व्यवस्था नए साल यानी एक जनवरी 2011 से लागू हो गई है। इसके तहत ग्राहकों को अब इंटरनेट या बैंक शाखाओं के जरिए इलेक्ट्रिॉनिक तरीके से धन स्थानांतरण करते समय अपनी खाता संख्या दो बार लिखनी होगी। यह इसलिए ताकि किसी तरह की गलती से बचा जा सके। एहतियात के लिए हालांकि अब भी ग्राहक के नाम आदि का ब्यौरा लिया जाएगा। लेकिन यह सिर्फ किसी जोखिम से बचाव के लिए होगा।

इलेक्ट्रॉनिक भुगतान वैसे तो कंप्यूटरीकृत ऑटोमेटिक प्रणाली से किया जाता है, लेकिन इसमें मानवीय हस्तक्षेप काफी होता है। ग्राहक का नाम तथा शाखा ब्यौरा आदि की जानकारी को मिलाने में काफी समय लग जाता है। देश के सभी बैंक चूंकि कोर बैंकिंग सॉफ्टवेयर [सीबीएस] माहौल में काम कर रहे हैं इसलिए दो ग्राहकों की खाता संख्या समान होने का मतलब ही नहीं होता है। लिहाजा फंड का ट्रांसफर केवल खाता संख्या के आधार पर किया जा सकता है। केंद्रीय बैंक के दिशानिर्देश को ध्यान में रखते हुए बैंकों ने नई प्रणाली अपना ली है। नई व्यवस्था आरटीजीएस, एनईएफटी, एनईसीएस तथा ईसीएस सहित सभी तरह की इलेक्ट्रॉनिक भुगतान प्रणाली तथा इंटरनेट बैंकिंग के जरिए धन स्थानांतरण पर लागू होगी। रिजर्व बैंक ने बैंकों से कहा है कि वे अपने पास आने वाले सभी सौदों को केवल ग्राहक की खाता संख्या के आधार पर निपटाएं।

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